
मंदिर परिचय
श्री शिव गोरक्षनाथाय नमः
श्री गेहलेश्वरनाथाय नमः
प्राचीन आदिशक्ति हिंगलाज माताजी मंदिर एवं गेहला रावल जी
धूणा गेहलपुर का संक्षिप्त विवरण
हिंगलाज मातेश्वरी मंदिर आसन खास स्थान एवं गेहला रावल जी का धूणा देवस्थान,
विभाग जिला अजमेर में पंजीयन क्रमांक 03/1998 के अंतर्गत पंजीकृत समिति है।
नाथ सम्प्रदाय सनातन हिन्दू धर्म का सबसे प्राचीन सम्प्रदाय माना जाता है। नाथ सम्प्रदाय के आदिनाथ भगवान शिव हैं। उदयनाथ पार्वती, महायोगी मत्स्येन्द्रनाथ एवं गुरु गोरक्षनाथ इसके प्रमुख स्तम्भ हैं। नव-नाथ एवं चौरासी सिद्ध नाथ सम्प्रदाय के महान तपस्वी योगेश्वर रहे हैं, जिन्होंने देश के अनेक राज्यों में तपस्या कर विभिन्न तपोस्थलों पर प्रवास किया।
नाथ सम्प्रदाय के विभिन्न पंथों में—
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आदिनाथ शिव से 17 पंथ,
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उदयनाथ पार्वती से 1 पंथ,
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शिवावतार योगी गुरु गोरक्षनाथ जी से 12 पंथ
इस प्रकार कुल 30 पंथ प्राचीन काल से संस्थापित होकर संचालित रहे। इनमें से समय और युग परिवर्तन के साथ 18 पंथों में से 12 पंथ विलुप्त हो गए तथा उदयनाथ पार्वती का पंथ पूर्णतः विलुप्त हो चुका है। वर्तमान समय में केवल 12 भेषज पंथ शेष हैं, जिनमें 6 पंथ भगवान शिव से तथा 6 पंथ गुरु गोरक्षनाथ जी से संबद्ध हैं।
वर्तमान में संचालित नाथ सम्प्रदाय के 12 पंथों में शिवजी के पंथ का प्रमुख पंथ रावल पंथ है। इस पंथ में राजस्थान के अनेक राज्य घरानों के राजा दीक्षित हुए, जिनमें मेवाड़ राज्य के राजा बप्पा रावल (काल भोज), हरित रावल, संतोष रावल, भद्र रावल, सिद्ध गेहला रावल, मल्लीनाथ जी, सिंध के मेढकीनाथ रावल, चन्द्रा रावल, लाखा रावल आदि प्रमुख हैं।
इनमें से अनेक सिद्धों की समाधियाँ ग्राम गेहलपुर में विद्यमान हैं। मातेश्वरी मंदिर के नीचे वर्तमान में 17 समाधियाँ स्थित हैं। इसके अतिरिक्त मंदिर प्रांगण तथा नागफणी पहाड़ी पर भी कई समाधियाँ एवं छतरियाँ निर्मित हैं।
गेहला रावल जी ने इसी स्थान पर कठोर तपस्या कर साक्षात माता हिंगलाज से एक प्रहर निवास का वरदान प्राप्त किया। माता ने उन्हें स्वयं की तलवार एवं भैरव जी का अस्त्र प्रदान किया, जो आज भी मंदिर में स्थापित हैं।
हिंगलाज माता की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक कथा
पौराणिक कथानुसार राजा दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ में भगवान शिव को यज्ञ-भाग न दिए जाने से क्रोधित होकर माता सती ने अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया। इससे व्यथित भगवान शिव माता सती के जलते हुए शरीर को लेकर दिशाओं में विचरण करने लगे और तांडव करने लगे।
सृष्टि को प्रलय से बचाने हेतु भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को 52 भागों में विभक्त कर दिया। जिन-जिन स्थानों पर माता सती के अंग एवं आभूषण गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई।
हिंगोल नदी के पास चन्द्रकूप पर्वत पर माता सती का ब्रह्मरंध्र (शीर्ष भाग) गिरा, जहाँ वह मूर्ति रूप में प्रकट हुआ। माता की मांग हिंगुल (कुमकुम) से सुशोभित थी, इस कारण यह स्थान हिंगुलालय कहलाया, जो कालांतर में हिंगलाज नाम से प्रसिद्ध हुआ।
यह शक्तिपीठ वर्तमान में पाकिस्तान अधिकृत बलूचिस्तान क्षेत्र में स्थित है। इस स्थान पर गुरु गोरक्षनाथ, गेहला रावल जी सहित अनेक योगियों ने तपस्या कर माता के दर्शन प्राप्त किए।
गेहला रावल जी ने गेहलपुर से बलूचिस्तान स्थित हिंगलाज माता मंदिर तक 6-7 बार पैदल यात्रा की। उनकी कठोर साधना से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और वरदान दिया कि वे प्रतिदिन एक प्रहर सशरीर निवास करेंगी। साथ ही माता ने अपना त्रिशूल एवं भैरवनाथ का खंडा प्रदान किया और कोटवीशा (भीमलोचन) रूप में विराजमान हुईं।
गेहला रावल जी के चमत्कार
एक बार एक मुस्लिम शासक अपनी सेना सहित यात्रा में प्यास से व्याकुल हो गया। गेहला रावल जी ने अपने छोटे से कमंडल से पूरी सेना, हाथी-घोड़े व ऊँटों की प्यास बुझा दी। आश्चर्यचकित होकर शासक ने श्रद्धा स्वरूप एक बेशकीमती दुशाला भेंट किया, जिसे गेहला रावल जी ने धूणे में अर्पित कर दिया।
जब शासक ने इसे अपमान समझा, तब गेहला रावल जी ने धूणे से हजारों दुशाले प्रकट कर दिए। लज्जित होकर शासक ने क्षमा याचना की और भूमि दान देने की इच्छा जताई। अंततः 52,000 बीघा भूमि की जागीर माताजी के नाम दान की गई, जिसके सीमाचिह्न आज भी विद्यमान हैं। इसका ताम्रपत्र आज भी मंदिर में सुरक्षित है।
गेहला रावल जी ने जीवन के अंतिम समय में चोहली में साधना की। शासक की पत्नी हुरमा देवी उनकी शिष्या बनीं और वहीं उनका महल एवं समाधि बनी।
उन्होंने अनेक अन्य चमत्कार भी किए, जिनमें भिनाई बावड़ी का एक रात में निर्माण, मुर्गे को दिया गया श्राप, गाय-शेर का चमत्कार आदि प्रसिद्ध हैं।
गेहला रावल जी का मुख्य तपस्थल गेहलपुर रहा, और उन्हीं के नाम पर इस ग्राम का नाम गेहलपुर पड़ा।
प्राचीन स्थिति से वर्तमान मे किये गये कार्य एवं भविश्य रूपरेखा
हिंगलाज मातेश्वरी मंदिर एवं गेहला रावल जी के धूणे का जीर्णोद्धार वर्तमान आयस पीर श्री शम्भू नाथ जी रावल (गेहला रावल जी की 85वीं पीढ़ी) के सान्निध्य में किया गया है।
अब तक बावड़ियाँ, समाधियाँ, गेहलेश्वर तालाब, अन्नपूर्णा भंडार, गौशाला, छतरियाँ, सड़क मार्ग, जलापूर्ति, यात्री निवास, संत निवास, भंडारा भवन, परिक्रमा पथ, सत्संग भवन, पुष्प उद्यान, प्रकाश व्यवस्था, वृक्षारोपण, धर्मशाला एवं स्नानागार आदि कार्य पूर्ण या प्रगतिरत हैं।
दिनांक 11 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक—
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हिंगलाज माताजी की नवीन मूर्ति सहित
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गोरक्षनाथ जी, द्वारपाल, भैरव जी की प्राण-प्रतिष्ठा
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भागवत पुराण कथा
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नवकुंडी शतचंडी यज्ञ
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विशाल भजन संध्या
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सिद्ध-योगी महाभंडारा
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सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम
आयोजित किए जाएंगे।
योगी श्री शम्भू नाथ जी रावल
महंत / आयस पीर
श्री आसन खास हिंगलाज मातेश्वरी
धार्मिक संस्था समिति
📍 ग्राम: गेहलपुर
तहसील: अरांई
जिला: अजमेर, राजस्थान
📱 मोबाइल: 9982440730
